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तुम मेरा जवाब बन जाओ

  जो मेरी खामोशी को सुन पाओ, जो मेरी बैचेनियों का जवाब बन जाओ। जो मुस्कराते होंठो, खिलखिलाती हँसी में छुपी उदासी भाँप जाओ और जो शरारती, चंचल आंखों में छुपी नमी और आँसू की बूंदे तुम्हे दिख जाएं , जो समझ जाओ कि जरूरी हो तुम मेरे लिए। जो समझ जाओ कि ढेर सारी बातें करनी है तुमसे। कुछ अपनी, कुछ मेरे सपनों की, कुछ मेरी भावनाएं और कुछ यूँही हाथ पकड़ कर साथ घूमते हुए बातें। मैं बताऊँ तुम्हे कि हाँ डर भी लगता है बिना तुम्हारे अकेले रहने में, भले ही बनी रहूं मैं मजबूत पहाड़ सी। मैं बताऊँ तुम्हें की मुझे खिलना है फूल सा तुम्हारे साथ, मुझे मुरझाया हुआ सिकुड़ा सा फूल नही बनना। मुझे निखरना है अभी भी बहुत, तेरे साथ जीवन मे आगे बढ़ते हुए कि अभी तो कई चीजें सीखनी बाकी हैं मुझे। तुम समझ जाओ जब कहूँ कि सब बढ़िया है, मैं देख लुंगी  तो दिल चाहता है कि तुम साथ मे रहो, बड़ी से बड़ी परेशानी से मुझे फर्क नही पड़ता, मैं झेल लुंगी। मैं मजबूत बहुत हूँ स्वयं में ही, हर चीज अच्छी कर सकती हूँ, बस साथ तुम्हारा, प्यार तुम्हारा, विश्वास तुम्हारा, मेरे खुद पर यकीन को और बढ़ा देता है कुछ भी हो सामने प्रश्न मेरे...

प्रेम -समय के साथ बदलते रूप

                                          प्रथम भाग प्रेम जिसमे टिका संसार सारा, जो आधार इस सृष्टि का ।                   आपका प्रेम, आपको किस दिशा में ले जा रहा है इसका मनन करना बहुत जरूरी है। As a human  आप उन्नति कर रहे हो या अवनति ये जानना जरूरी है। अगर किसी के आपके लाइफ में आने से आप positive person बन रहे हो, आपकी आध्यात्मिक उन्नति हो रही है, आप अपने फर्ज व कर्तब्यों को समंझ रहे हो, सामाजिक व आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहे हो, जो आपको सही और गलत की समंझ दे रहा हो, जो आपको आपके अच्छे और विकास के लिए प्रेरित कर रहा हो वही व्यक्ति आपके लायक है नही तो नही। और जो ऐसा न हो, ऐसे से कैसे प्यार, क्यो प्यार. ऐसे इंसान से दूर रहना ही भला है।  केवल शारीरिक आकर्षण के आधार पर जो प्रेम होता है वह ज्यादा समय रहता नही, आपका आकर्षण खत्म, रिश्ता खत्म. क्या लाभ ऐसे सम्बन्धो का?? जहाँ आधार प्रेम नही केवल बाहरी सौंदर्य, जरूरत,  या लाभ हानि ह...

मेरे देश के प्रहरी

           नभ जल थल के वीर योद्धा, वीरता से अडिग खड़े, युद्ध की विनाश लीला में, जो मृत्यु से भी किंचित न डरें। भारत माँ के सच्चे सपूत, वो माँ के लाडले, भूल कर सब कुछ अपना पराया, जो रणभूमि की और चले। कुछ खैर नही दुश्मन की, स्वयम को बचा ले अब हर एक को देते मृत्यु आलिंगन मंजिलों से पहले रणबाँकुरे रुकते नहीं नमन है उनको ह्रदय से जो युद्धभूमि में शेर से दहाड़ रहे     अम्बिका 'रेनू'