विश्वास
★मृत्यु का भय? नही है. ★स्वयं से प्रेम? अथाह. ★ये विरोधाभाष नही? नही. ★क्यो? मृत्यु मेरी नही, शरीर की और यदि मृत्यु हुई तो प्रभु इच्छा से नया जन्म या मोक्ष ★और स्वयं से प्रेम? प्रभु से प्रेम, प्रभु की प्रत्येक रचना से प्रेम, मैं स्वयं प्रभु रचित, तो स्वयं से प्रेम क्यो न हो ★पुनः नव जीवन?? प्रभु रचित संसार मे मेरे कर्म, कर्म बंधन, कर्तव्य अपूर्ण उन्हें पूर्ण करने का एक ओर अवसर ★मोक्ष? सीधे प्रभु मिलन, ब्रह्मांड में विलीन और घुलित ★पुनः जीवन मे दुःख? शायद मैं अधिक प्रिय प्रभु को, वो चाहते मैं उन्हें कभी भी, किसी भी परिस्थिति में न बिसराऊ ★प्रभु पर विश्वास का कारण? क्योकि वो हैं. सदा से, सृष्टि से पहले से भी, बाद भी, जब कुछ नही था तब भी, जब बहुत कुछ है तब भी, विज्ञान में भी और ज्ञान में भी, अणु में भी, परमाणु में भी शून्य में भी, अनन्त में भी🙏🙏🙏 (विचार चलते रहते मन मे, बस यूँही उतार लिए शब्दों में) रेनू'अम्बिका'