मेरे देश के प्रहरी

          

नभ जल थल के वीर योद्धा,
वीरता से अडिग खड़े,
युद्ध की विनाश लीला में,
जो मृत्यु से भी किंचित न डरें।
भारत माँ के सच्चे सपूत,
वो माँ के लाडले,
भूल कर सब कुछ अपना पराया,
जो रणभूमि की और चले।
कुछ खैर नही दुश्मन की,
स्वयम को बचा ले अब
हर एक को देते मृत्यु आलिंगन
मंजिलों से पहले रणबाँकुरे रुकते नहीं
नमन है उनको ह्रदय से
जो युद्धभूमि में शेर से दहाड़ रहे
   
अम्बिका 'रेनू'


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