संदेश

मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पुराने दिन और रिश्ते💜💜

चित्र
एक समय था जब लोग बहुत देर तक परिवार के साथ, मित्रों के साथ बैठते थे, बातें करते थे पर आज के समय मे लोगों के बीच संवाद/बातचीत या कंवर्सेशन बिल्कुल ही कम होती जा रही है। चलो कोई अकेले हैं तो फोन में व्यस्त होना समझ आता है पर परिस्थिति तब और भी गलत लगती है जब कोई साथ है या पूरे परिवार के बीच मे भी अगर कोई अपने फोन में ही व्यस्त है। सब साथ हों और सब ही अपने अपने फोन में बिजी हो तब बड़ी अजीब स्थिति हो जाती  है। कहाँ के सुख कहाँ के दुःख। पहले से शाम के चाय पानी के वक्त या रात के खाने के समय व बाद में सब साथ बैठते थे बातें होती थीं, एक दूसरे की परेशानियों को समझते थे, खुशियां बांटते थे पर अब इन सब को मन तरस जाता है। अपने सुख दुख बांटकर मन भी हल्का व खुश हो जाता था, लोग किस्से कहानियां, अपने अनुभव शेयर करते थे। शायद तभी इतना अकेलापन नही था और आज सब  डिजिटल भीड़ में तो हैं पर उनमें से कितने एक्चुअल प्रॉब्लम में आपके साथ, आपके पास होंगे कोई नही जानता।  आज हमारे पास फ्रेंड्स की लिस्ट मिलियन्स तक होती है पर जब आप कठिनाई में होंगे तो सामने कोई नही। जबकि पहले लोग आपको सुनते थे, लोग आपस म...