प्रतीक्षा लम्बी होगी तुम्हारी

 प्रतीक्षा लम्बी होगी तुम्हारी

तुमने प्रेम चुन लिया
ईश्वर को चुना होता तो
शायद मिल भी जाते कुछ पहले
पर तुमने प्रेम चुन लिया
प्रेम, जिसे पाने को, महसूस करने को

श्री हरि को भी लेना पड़ा जन्म,

करनी पड़ी उन्हें भी प्रतीक्षा

आना पड़ा उन्हें द्वापर में फिर से

साथ पाने के लिए राधा का।

केवल साथ पाने के लिए

जब लेना पड़ा जन्म हरि को भी

कृष्ण रूप में

तुम तो फिर भी

मनुष्य हो

सोचो कितने जन्म लगेंगे

युगों तक की प्रतीक्षा जब

कृष्ण की ही रही
सोचो, तुम्हारी प्रतीक्षा क्या होगी
और केवल श्री हरि ही क्यों
प्रेम में विकल और बावरे तो
महादेव भी हुए
प्रतीक्षा तो उनकी भी लम्बी रही
कई युगों की साधना रही
कई युगों का ध्यान रहा
सती जो गईं
वो युगों बाद ही लौटीं
सती को जाने में और
पार्वती के आने में
सोचो कितनी प्रतीक्षा रही
अनवरत, लगातार और लगातार
तभी तो कहा प्रतीक्षा लम्बी होगी तुम्हारी
तुमने प्रेम चुन लिया
जहाँ ईश्वर भी आधीन प्रेम के
उनके भाग में भी प्रतीक्षा आई
तुम तो सूक्ष्म से प्राण रूप
तुम्हारी प्रतीक्षा कितनी लम्बी होगी
चुन लिया होता यदि ईश्वर को
मिल जाते वो तुमको कुछ पहले ही
चलो चुन ही लिया प्रेम तो
अब रहना शिव से अडिग
और कृष्ण से प्रयासरत
शायद मिल जाये किसी जन्म में
तुमको भी, प्रेम तुम्हारा

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

” मेरा बचपन मेरा दादू पार्ट-3 “

तुम्हारे साथ, एक चाय मिट्टी के कुल्हड़ में

तुम्हारा अधिकार