कर सकते हो प्रतीक्षा
कर सकते हो प्रतीक्षा तब तक.......
जब तक पूरे कर लूं फर्ज अपने
जब तक पूर्ण हो जाएं दायित्व मेरे
जब तक निभा लू अपने सारे वचन
जब तक खत्म कर लूं काम अपने सारे
जब तक सम्पूर्ण हो जाये कर्तव्य मेरे
जब तक खुद से सम्बंधित हर एक व्यक्ति का
मुझ पर कोई आभार, कोई उधार, कोई ऋण
बाकी न रहें।
जब तक मेरी हर एक श्वास मुक्त न हो
जब तक आत्मा पर कोई बोझ न हो
जब तक आंखों में तुम्हारे संग के अतिरिक्त
और कोई स्वप्न बचा न हो।
अब और क्या कहूँ? कैसे समझाऊँ? पर क्या
कर सकते हो प्रतीक्षा अनन्त काल तक
अम्बिका 'रेनू'
सभी मेरी मौलिक रचनाएं हैं कृपया कॉपी न करें।
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