प्रभ भरोसे
कुछ भी नही प्रभु मैं, बस आपके चरणों की धूल हूँ
मैं संवर रही हूँ, निखर रही हूँ जब से शरण मे आई हूँ
अब चिंता कुछ है नही मुझे, तुम हो न सब देखने को
संभालने को, रास्ता दिखाने को, नैय्या पार लगाने को
तो क्यो चिंता करूँ मैं व्यर्थ में ही
क्यों मन को भरमाऊं मैं
जो भी है तुम देख रहे हो
चित्त को काहे अधीर करूँ मैं
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