ईश्वरीय कृपा

 सुबह की उजली लालिमा ली हुई सूर्य की किरणें, जब बिखरती है विशाल नीले आसमानी से पटल में, जब चहचहाती हैं चिड़ियां मीठी सी आवाज में, जब मंद मंद सी बयार बहती है छूकर पेड़ो की पत्तियों को, जब सूरज और चंदा होते हैं कुछ देर को एक साथ,आसमान में एक दूसरे के आमने सामने  और जब रात मुस्करा कर लेती है विदा और करती है स्वागत सवेरे का,  सुबह का हर एक वो पल मुझे यकीन दिलाता है ईश्वर की असीम शक्ति, कृपा और प्रेम का........

जो अनवरत है

लगातार है......







अम्बिका 'रेनू'

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