तुम बनो शांत समंदर से
तुम बनो शांत समंदर से
मैं तो बनूँगी अल्हड़ सी नदी
जिसे सीमाओं में न बांधा जा सके जब वो अपने उफान पर आए
तुम बनना बहुत समझदार से
मैं तो बनूँगी कुछ कुछ चँचल बेवकूफ सी, जिसकी शैतानियों से तुम पार ही न पा सको
तुम करते रहना प्लानिंग्स ढेर सारी
क्या करना, कैसे करना
मैं करूँगी मनमानियां अपनी, बिना आगे पीछे कुछ भी सोचे
मैं बस एक बात चाहूंगी
मेरी हर बेवकूफी, शरारत और गलती पर मेरे साथ रहना
ताकि मैं सारा ठीकरा तुम्हारे सिर डालकर
निश्चिंतता से अगली शैतानी कर पाऊँ
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